कोहबर चित्रकला में ‘कोहबर’ का अर्थ “गुफा” माना जाता है। यह शब्द ‘कोह’ (गुफा) और ‘बर’ (दूल्हा) से मिलकर बना बताया जाता है। यह परंपरा बिहार और झारखंड में विवाह अनुष्ठानों के अंतर्गत वैवाहिक कक्ष की दीवारों को सजाने से संबंधित है, जिसमें मोर, कछुआ और कमल जैसे रूपांकन उर्वरता और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं।
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