कोल विद्रोह (1831)
1831 का कोल विद्रोह छोटानागपुर क्षेत्र में झारखंड की राजनीतिक-सांस्कृतिक पहचान की प्रथम संगठित अभिव्यक्ति माना जाता है। यह विद्रोह ब्रिटिश भूमि नीतियों और जमींदारी शोषण के विरुद्ध व्यापक आदिवासी प्रतिरोध के रूप में उभरा। इससे पूर्व के विद्रोह, जैसे तिलका मांझी विद्रोह (1784) और चुआर विद्रोह (1798), इस प्रकार की संगठित क्षेत्रीय राजनीतिक चेतना का प्रतिनिधित्व नहीं करते थे। तथाकथित मुंडा विद्रोह (1797) ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं है। कोल विद्रोह ने आगे चलकर झारखंड आंदोलन तथा 20वीं शताब्दी में पृथक राज्य की मांग की आधारशिला रखी।
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