कई पौधों में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने से प्रकाश संश्लेषण की दर घट जाती है। O2 द्वारा प्रकाश संश्लेषण के इस अवरोध की खोज 1920 में जर्मन जैव रसायनज्ञ वारबर्ग ने क्लोरेला (एक हरी शैवाल) में की थी, जिसे वारबर्ग प्रभाव कहा जाता है। जब CO2 का स्तर कम और प्रकाश तीव्र होता है, तब O2 द्वारा प्रकाश संश्लेषण का सबसे अधिक अवरोध होता है। यह प्रभाव C3 पौधों (सोयाबीन) और C4 पौधों (ज्वार, मक्का, गन्ना) आदि में देखा जाता है।
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