अगर अवध के नवाब का प्राकृतिक उत्तराधिकारी होता
1856 में ब्रिटिश साम्राज्य ने लॉर्ड डलहौजी द्वारा लागू की गई व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse) नीति के तहत अवध का विलय किया। बक्सर की लड़ाई के बाद से अवध के नवाब ब्रिटिशों के वफादार सहयोगी थे, फिर भी नवाब वाजिद अली शाह पर कुप्रशासन का आरोप लगाकर विलय का आधार बनाया गया। यदि नवाब का कोई प्राकृतिक उत्तराधिकारी होता तो व्यपगत सिद्धांत लागू नहीं होता, जिससे अवध के विलय को रोका जा सकता था।
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