तोरी फतेहपुर की स्थापना 1812 में दीवान राय सिंह ने की थी। यह मध्य भारत की बुंदेलखंड एजेंसी की आठ हष्ट-भैया जागीरों में से एक थी। इस पर बुंदेला राजपूतों का शासन था और ब्रिटिश काल में इसे अर्ध-स्वायत्त दर्जा प्राप्त था। स्वतंत्रता के बाद जागीर प्रथा समाप्त कर दी गई।
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