शोधकर्ताओं ने पाया है कि डीनोकोकस रेडियोड्यूरन्स 14,000–24,000 पृथ्वी वायुमंडल के अत्यधिक उच्च दबाव में भी जीवित रह सकता है, जो ग्रहों के टकराव के दौरान उत्पन्न होने वाले दबाव के समान है। यह एक जीवाणु है, जो आयनीकरण विकिरण के प्रति अपनी अत्यधिक प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रसिद्ध है, और इसी कारण इसे “कोनन द बैक्टीरियम” उपनाम दिया गया है। यह ग्राम-पॉजिटिव, गतिहीन तथा लाल रंग का जीव है। इसकी खोज सर्वप्रथम 1956 में विकिरण-उपचारित डिब्बाबंद मांस में हुई थी। यह मनुष्यों के लिए घातक विकिरण खुराक से हजारों गुना अधिक विकिरण खुराक में भी जीवित रह सकता है, जिससे यह पृथ्वी पर सबसे अधिक विकिरण-प्रतिरोधी जीवों में से एक माना जाता है।
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