सरहुल एक प्रमुख आदिवासी त्योहार है, जो प्रकृति पूजा पर आधारित है और सूर्य तथा पृथ्वी के मिलन एवं जीवन के नवीनीकरण का प्रतीक माना जाता है। इस त्योहार में साल वृक्ष की पूजा की जाती है, जिसे ‘सामा माता’ का निवास स्थान माना जाता है। इसे ओरांव, मुंडा, संथाल, खड़िया तथा हो जनजातियों द्वारा मनाया जाता है। यह मुख्य रूप से झारखंड तथा ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के कुछ भागों में प्रचलित है। यह तीन दिवसीय उत्सव है, जो सामुदायिक भोज के साथ समाप्त होता है। इसके पश्चात बुवाई और जुताई जैसी कृषि गतिविधियाँ आरंभ होती हैं, जो प्रकृति और आजीविका के बीच संबंध को दर्शाती हैं।
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