पंडित रघुनाथ मुर्मू
पंडित रघुनाथ मुर्मू ने 1925 में संथाली भाषा के लिए ओल चिकी लिपि का निर्माण किया। उन्होंने इस लिपि का उपयोग कर साहित्यिक एवं शैक्षिक सामग्री का सृजन किया। यह लिपि विशेष रूप से संथाली भाषा के लेखन हेतु विकसित की गई थी। उनके प्रयासों ने संथाली साहित्य और साक्षरता के विकास की मजबूत आधारशिला रखी। ओल चिकी लिपि संथाली लेखन के लिए आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त है और अन्य भारतीय लिपियों से भिन्न है।
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