26 जून 1539 को शेर शाह सूरी ने बक्सर के पास चौसा की लड़ाई में हुमायूँ को हराया। उन्होंने 17 मई 1540 को कन्नौज की लड़ाई में फिर से हुमायूँ को हराया और उसे भारत छोड़कर निर्वासन में रहने के लिए मजबूर किया। हुमायूँ 15 वर्षों तक एक भगोड़े के रूप में भटकते जीवन जीने को विवश हुआ। इस घटना ने शेर शाह को भारत के सबसे यादगार विजयी शासकों में से एक बना दिया।
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