शिव दयाल सिंह, जिन्हें स्वामीजी महाराज भी कहा जाता है, ने 1861 में उत्तर प्रदेश के आगरा में राधा स्वामी संप्रदाय की स्थापना की। यह आंदोलन सूरत-शब्द योग पर केंद्रित है, जिसमें आंतरिक ध्वनि और प्रकाश पर ध्यान दिया जाता है। यह भक्ति, संत और योगिक तत्वों का समन्वय करते हुए एक विशिष्ट आध्यात्मिक परंपरा के रूप में विकसित हुआ।
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