भारत के राष्ट्रपति
यदि यह प्रश्न उठता है कि किसी सदस्य को अनुच्छेद 102(1) के तहत अयोग्य ठहराया जाए या नहीं, तो यह निर्णय राष्ट्रपति द्वारा लिया जाता है और उनका निर्णय अंतिम होता है। राष्ट्रपति आमतौर पर इस संबंध में निर्णय लेने से पहले भारत के चुनाव आयोग की राय लेते हैं। हालांकि, यदि अनुच्छेद 102(2) के तहत यह प्रश्न उठता है कि कोई सदस्य संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य हुआ है या नहीं, तो यह मामला राज्यसभा के सभापति को भेजा जाता है और इस स्थिति में सभापति का निर्णय अंतिम होता है।
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