भारत में केंद्रीय सहकारी बैंक जिला स्तर पर स्थापित किए जाते हैं। ये ग्रामीण और कृषि विकास के लिए प्रमुख वित्तीय संस्थान होते हैं जो सहकारी समितियों और किसानों को ऋण और वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं। सहकारी समितियां अधिनियम के तहत स्थापित ये बैंक सहकारी ऋण संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और जमीनी स्तर पर आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं।
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