‘अलहा-खंड’ बुंदेलखंड का एक महाकाव्यात्मक काव्य है, जिसका वर्णन बनफरी कवियों द्वारा किया गया है। इसमें महोबा क्षेत्र के 12वीं शताब्दी के वीर नायक अल्हा और उदल के पराक्रम का वर्णन है। यह बुंदेली बोली की प्रमुख मौखिक परंपराओं में से एक है।
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