न्यायाधीशों को कानून बनाने में शामिल नहीं होना चाहिए
न्यायिक संयम का अर्थ है कि न्यायाधीशों को केवल यह तय करने की सीमित भूमिका निभानी चाहिए कि कानून क्या है, जबकि कानून बनाने का कार्य विधायिका और कार्यपालिका पर छोड़ देना चाहिए। साथ ही, न्यायाधीशों को अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक मान्यताओं को न्यायिक निर्णयों पर प्रभाव नहीं डालने देना चाहिए।
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