उत्पादकता वास्तव में दक्षता और प्रभावशीलता पर निर्भर करती है। ये दोनों किसी भी उत्पादक उद्योग के लिए आवश्यक हैं। भारत में कृषि क्षेत्र की उत्पादकता कम होने के पीछे पारंपरिक खेती के तरीके, आधुनिक मशीनों की कमी, किसानों के लिए वित्तीय संसाधनों की अनुपलब्धता, उच्च गुणवत्ता वाले बीज और उर्वरकों की कमी तथा भूमि स्वामित्व जैसी समस्याएं जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, भूमि पर बढ़ती जनसंख्या का दबाव भी कृषि उत्पादन में कमी का एक महत्वपूर्ण कारण है। वित्त, विपणन और भंडारण सुविधाओं की कमी भी भारत में कृषि पिछड़ेपन के लिए उत्तरदायी है। सहकारी समितियां और अन्य संस्थागत एजेंसियां अब तक ग्रामीण साहूकारों को पूरी तरह समाप्त नहीं कर पाई हैं। किसानों के लिए अभी भी पर्याप्त भंडारण सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे वे अपनी कृषि उपज को अच्छे दामों पर बेच सकें।
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