जनहित याचिका की अवधारणा इस तथ्य को स्वीकार करती है कि कानूनी सेवाओं का सामान्य बाजार समाज के बड़े वर्गों को कानूनी प्रतिनिधित्व प्रदान करने में असफल रहता है। इनमें आमतौर पर गरीब, पर्यावरणविद, उपभोक्ता, नस्लीय और जातीय अल्पसंख्यक तथा कई अन्य लोग शामिल होते हैं।
This Question is Also Available in:
Englishಕನ್ನಡ