देबेन्द्रनाथ टैगोर
देबेन्द्रनाथ टैगोर, जो रवीन्द्रनाथ टैगोर के पिता थे, पारंपरिक शिक्षा और पश्चिम के नए विचारों का सर्वश्रेष्ठ मिश्रण थे। 1839 में उन्होंने राम मोहन राय के विचारों के प्रचार के लिए तत्वबोधिनी सभा की स्थापना की। समय के साथ इसमें राय और डेरोजियो के प्रमुख अनुयायी शामिल हो गए। तत्वबोधिनी सभा और इसकी प्रकाशन इकाई तत्वबोधिनी पत्रिका ने बंगाली भाषा में भारत के अतीत के व्यवस्थित अध्ययन को बढ़ावा दिया।
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