चित्तरंजन दास (देशबंधु) (1870-1925) एक महान राष्ट्रवादी और प्रसिद्ध विधिवेत्ता थे। उन्होंने 1908 में अलीपुर षड्यंत्र मामले में अरबिंदो घोष का बचाव किया और ढाका षड्यंत्र मामले में भी रक्षा वकील रहे। 1921 में अहमदाबाद में हुए कांग्रेस अधिवेशन में वे निर्वाचित अध्यक्ष बने। उन्होंने स्वराज्य पार्टी की स्थापना की। 1923 में लाहौर और 1924 में अहमदाबाद में हुए अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अधिवेशन की अध्यक्षता भी की।
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