संस्कृत कवि पद्मगुप्त परिमल ने "नवसाहसांकचरितम्" की रचना की, जिसमें उन्होंने धार के परमार राजा सिंधुराज (995-1010 ई.) के वीरतापूर्ण कार्यों का वर्णन किया है। उन्हें "नव साहसांक" की उपाधि प्राप्त थी। यह ग्रंथ राजा भोज के पिता सिंधुराज और नागराज शंखपार की पुत्री शशिप्रभा के विवाह तथा उनके जीवन के व्यक्तिगत पहलुओं से संबंधित है।
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