दिल्ली सल्तनत के दौरान वास्तुकला ने भारतीय सभ्यता को इस्लामी सभ्यता के साथ मिलाया और भारतीय उपमहाद्वीप को सांस्कृतिक रूप से एकीकृत किया। इस समय हिंदू-मुस्लिम वास्तुकला की एक नई शैली विकसित हुई, जिसमें हिंदू वास्तुकला की सजावटी भव्यता कम हो गई और उसकी जगह ज्यामितीय आकृतियों, सुलेख, शिलालेख आदि जैसे नए तत्व आए। दिल्ली सल्तनत की वास्तुकला में गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी वंशों द्वारा निर्मित इमारतें और स्मारक शामिल हैं, जो लगभग 320 वर्ष पहले दिल्ली और उसके आसपास बनाए गए थे।
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