इक्ता प्रणाली में साम्राज्य की भूमि को छोटे-बड़े भागों में बांटकर इन्हें इक्ता कहा जाता था और सैनिकों, अधिकारियों व अमीरों को सौंपा जाता था। शुरुआत में इक्ता वेतन आधारित था लेकिन फिरोज शाह तुगलक के शासन में यह पैतृक संपत्ति बन गया।
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