Q. डोकरा कला का पारंपरिक रूप से किस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है?
Answer: मूर्तियाँ बनाना
Notes: डोकरा कला झारखंड की एक पारंपरिक धातु शिल्पकला है, जिसमें प्रायः पीतल या कांसे का उपयोग किया जाता है। इसे आदिवासी समुदाय ‘लॉस्ट-वैक्स’ तकनीक द्वारा निर्मित करते हैं। इस कला का उपयोग देवी-देवताओं, पशु-आकृतियों, मानव प्रतिमाओं तथा सजावटी वस्तुओं के निर्माण में किया जाता है। यह शिल्प परंपरा लगभग 4000 वर्ष पुरानी मानी जाती है। इसमें पहले मधुमक्खी के मोम से मॉडल तैयार किया जाता है, फिर उसे मिट्टी के सांचे में ढालकर पिघली हुई धातु डाली जाती है। डोकरा कला का बुनाई, कृषि या पशु शिकार से कोई संबंध नहीं है।

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