झारखंड में विद्युत उत्पादन का मुख्य स्रोत तापीय ऊर्जा है। राज्य की तापीय ऊर्जा क्षमता कुल स्थापित क्षमता का लगभग 85–90% से अधिक है। झारखंड में कोयले के प्रचुर भंडार हैं, जो भारत के कुल कोयला भंडार का लगभग 30% माने जाते हैं। प्रमुख तापीय विद्युत संयंत्रों में पतरातू (840 MW) और तेनुघाट (420 MW) शामिल हैं। राज्य की कुल तापीय क्षमता लगभग 8,955 MW है, जो 34 इकाइयों में विस्तृत है। जलविद्युत का योगदान लगभग 4%, सौर ऊर्जा का लगभग 2.25% है, जबकि पवन ऊर्जा का योगदान नगण्य है। ये आँकड़े झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2023–24 तथा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की रिपोर्टों के अनुरूप हैं।
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