उत्पीड़ित लोगों का शोषण
झारखंड में आदिवासी आंदोलन का मुख्य कारण शोषित आदिवासी जनसंख्या का व्यवस्थित शोषण था। इसमें पैतृक भूमि और वनों से बेदखली जैसे मुद्दे शामिल थे, जिन्हें आदिवासी समुदाय पवित्र मानते हैं। 1975 में केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक अध्ययन में आदिवासी भूमि के बड़े पैमाने पर हड़पने को प्रमुख कारणों में बताया गया था। औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप अल्पविकास, रोजगार से वंचित होना और बाहरी लोगों द्वारा शोषण जैसी समस्याओं ने असंतोष को और गहरा किया। यद्यपि वनों की कटाई और अवैध खनन जैसी समस्याएँ भी थीं, लेकिन मूल कारण आदिवासी लोगों और उनके संसाधनों का निरंतर शोषण था।
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