झारखंड में लेटराइट मिट्टी मुख्यतः पलामू और सिंहभूम जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। यह मिट्टी तीव्र अपक्षय, अधिक वर्षा तथा उच्च तापमान की परिस्थितियों में बनती है। इसमें लौह एवं एल्युमिनियम ऑक्साइड की मात्रा अधिक होने के कारण यह अम्लीय तथा कम उपजाऊ होती है। इन विशेषताओं के कारण, बिना मृदा-सुधार (मृदा संशोधन) के यह कृषि के लिए कम उपयुक्त मानी जाती है। लाल और काली मिट्टी की तुलना में लेटराइट मिट्टी में उत्पादकता सामान्यतः कम होती है।
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