UNESCO ने 2010 में छऊ नृत्य को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था। छऊ पूर्वी भारत की एक पारंपरिक नृत्य शैली है, जिसमें झारखंड की सरायकेला शैली भी शामिल है। इसमें मार्शल आर्ट, कलाबाजी तथा महाभारत जैसे महाकाव्यों की कथाओं का मंचन किया जाता है। मयूरभंज शैली को छोड़कर, छऊ में सामान्यतः मुखौटों का प्रयोग किया जाता है।
This Question is Also Available in:
English