ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार चेरो विद्रोह के नेता भुखन सिंह की मृत्यु 1802 में हुई थी, जिससे इस विद्रोह का अंत माना जाता है। उपलब्ध स्रोतों में उनके औपचारिक ‘निष्पादन’ (फांसी) का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता; सामान्यतः 1802 को ही उनके अंत/मृत्यु-वर्ष के रूप में उल्लेखित किया जाता है।
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