बनवारी लाल सरकारी गवाह बन गए और काकोरी षड्यंत्र मामले में महत्वपूर्ण गवाही दी। 1925 के मुकदमों के दौरान उनकी गवाही ब्रिटिश अभियोजन पक्ष के लिए निर्णायक सिद्ध हुई, जिसके आधार पर HRA के कई सदस्यों को दोषी ठहराया गया।
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