Q. असुर जनजाति का पारंपरिक व्यवसाय क्या है?
Answer: लौह धातु गलाना
Notes: झारखंड की असुर जनजाति पारंपरिक रूप से लौह धातु गलाने के लिए जानी जाती है। वे नेतरहाट पठार क्षेत्र से प्राप्त मैग्नेटाइट, हेमेटाइट और लेटराइट जैसे स्थानीय अयस्कों का उपयोग करते थे। उनकी धातुकर्म-परंपरा में साल की लकड़ी के कोयले की सहायता से लोहा गलाना शामिल था। वन कानूनों और औद्योगीकरण के कारण अनेक असुर कृषि की ओर भी अग्रसर हुए, फिर भी लौह धातु गलाना उनका प्रमुख पारंपरिक व्यवसाय माना जाता है, विशेषकर गुमला, लोहरदगा, पलामू और लातेहार जिलों में।

This Question is Also Available in:

English