गंगानारायण का हंगामा
अंग्रेजों ने भूमिज विद्रोह को "गंगानारायण का हंगामा" नाम दिया था, क्योंकि इसके नेता गंगानारायण सिंह थे। यह विद्रोह 1832-33 के दौरान बंगाल के ढालभूम और जंगल महल क्षेत्रों में हुआ। गंगानारायण सिंह लक्ष्मण नारायण के पुत्र तथा बीरभूम के जमींदार के संबंधी थे। इस विद्रोह का उद्देश्य ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की शोषणकारी राजस्व नीतियों का विरोध करना था। इसकी औपचारिक शुरुआत 26 April 1832 को हुई, जब गंगानारायण सिंह ने दीवान माधव सिंह की हत्या कर दी। यह आंदोलन बंगाल, छोटानागपुर और ओडिशा के कुछ भागों में फैल गया, जिसमें आदिवासी समुदाय और जमींदार भी सम्मिलित हुए।
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