भारतेंदु हरिश्चंद्र
भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850-1885) केवल 34 वर्ष जिए, लेकिन वे इतने महान लेखक थे कि उन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य और हिंदी रंगमंच का जनक माना जाता है। उनका उपनाम "रसा" था। 1880 में काशी के विद्वानों ने हिंदी साहित्य के विकास में उनके योगदान के लिए एक सार्वजनिक सभा में उन्हें "भारतेंदु" की उपाधि दी। भारत सरकार 1983 से हिंदी जनसंचार में मौलिक लेखन को बढ़ावा देने के लिए भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार प्रदान कर रही है।
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