Q. 'सर्वोदय' से गांधीजी का क्या आशय था?
Answer: अछूतों या दलितों का उत्थान
Notes: 'सर्वोदय' एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है 'सभी का उत्थान' या 'सभी की प्रगति'। गांधीजी ने 1908 में जॉन रस्किन की राजनीतिक अर्थशास्त्र पर आधारित पुस्तक 'अन्टू दिस लास्ट' के अनुवाद के लिए इस शब्द का उपयोग किया था। बाद में उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक विचारधारा के आदर्श रूप में अपनाया। गांधीवादी दर्शन में सर्वोदय को भारतीय समाज की सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं का समाधान माना गया है। यह राजनीतिक और आर्थिक शक्ति के विकेंद्रीकरण के माध्यम से एक आदर्श सामाजिक व्यवस्था की कल्पना करता है, जिससे व्यक्ति और समाज का समग्र विकास संभव हो सके। बाद में विनोबा भावे जैसे गांधीवादी विचारकों ने भी इस अवधारणा को अपनाया। संक्षेप में, सर्वोदय एक नए मानवतावादी, सरल, अहिंसक और विकेंद्रीकृत समाज की परिकल्पना करता है, जहां मनुष्य केंद्र में होता है।
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