मौलवी लियाकत अली ने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व इलाहाबाद में किया था। उन्होंने अपनी सरकार स्थापित की और कई राजनीतिक व सैन्य नियुक्तियाँ कीं। लेकिन जल्द ही कर्नल नील के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने शहर पर दोबारा कब्जा कर लिया। यह महान स्वतंत्रता सेनानी वहां से बच निकले लेकिन 14 साल बाद सितंबर 1871 में सूरत के भायखला रेलवे स्टेशन पर दोस्तों की गद्दारी के कारण पकड़े गए। उन पर मुकदमा चला और मृत्युदंड सुनाया गया लेकिन 17 मई 1892 को रंगून में कैद के दौरान उनका निधन हो गया।
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