कंपनी को 1717 में मुगल सम्राट फर्रुखसियर से बॉम्बे टकसाल में मुगल शैली के सिक्के ढालने का अधिकार मिला। इन मुगल शैली के रुपयों का निर्माण 1717 से 1835 में भारत में सिक्कों की एकरूपता तक बॉम्बे टकसाल में किया गया। इन सिक्कों को कैरोलिना (सोना), एंगलिना (चांदी), कप्परून (तांबा) और टिन्नी (टिन) कहा जाता था।
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