पहला अंतर्राष्ट्रीय पाली सम्मेलन अगस्त 2025 में श्रीलंका के कैंडी में भारत के सहायक उच्चायोग और पेराडेनिया विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित हुआ था। इसमें श्रीलंका, भारत और अन्य देशों के विद्वान शामिल हुए। सम्मेलन का मुख्य विषय "पाली भाषा का भविष्य" था और इसमें थेरवाद परंपरा, पांडुलिपि अध्ययन और पाली के विकास पर चर्चा हुई।
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