IIT मद्रास ने रसायन और उर्वरक मंत्रालय के समर्थन से शून्य-अपशिष्ट बायोप्लास्टिक्स पहल शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक प्लास्टिक का जैव-अपघटनीय, माइक्रोप्लास्टिक-मुक्त और किफायती विकल्प विकसित करना है। तीसरी पीढ़ी के बायोप्लास्टिक्स कृषि अवशेष, शैवाल और कचरे का उपयोग करते हैं, जिससे पहले के खाद्य-आधारित बायोप्लास्टिक्स से जुड़ी खाद्य सुरक्षा चिंताओं से बचा जा सके। ये बायोप्लास्टिक्स पूरी तरह से विघटित हो जाते हैं, कोई हानिकारक कण नहीं छोड़ते और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हैं। केंद्र भोजन पैकेजिंग और चिकित्सा वस्त्रों के लिए बायोप्लास्टिक्स का भी अन्वेषण कर रहा है, जिसमें कृषि अपशिष्ट से जैव-अपघटनीय इम्प्लांट शामिल हैं।
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