स्विगी इंस्टामार्ट को एफएसएसएआई के 9 नोटिस, खाद्य सुरक्षा और लेबलिंग उल्लंघनों पर सख्त कार्रवाई

स्विगी इंस्टामार्ट को एफएसएसएआई के 9 नोटिस, खाद्य सुरक्षा और लेबलिंग उल्लंघनों पर सख्त कार्रवाई

भारत में तेजी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स सेक्टर के बीच खाद्य सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर उभरी है। इसी क्रम में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 11 जुलाई 2026 को स्विगी इंस्टामार्ट को नौ नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर जारी किए गए, जिनमें एक्सपायर्ड, खराब, दूषित और असुरक्षित खाद्य उत्पादों की बिक्री के आरोप लगाए गए हैं। इस कार्रवाई ने डिजिटल किराना और खाद्य वितरण प्लेटफॉर्मों की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।

भारत में खाद्य सुरक्षा नियमन की व्यवस्था

भारत में खाद्य सुरक्षा का नियमन भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा किया जाता है, जिसकी स्थापना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई थी। यह संस्था खाद्य कारोबार संचालकों को लाइसेंस जारी करती है, खाद्य गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग, लेबलिंग और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की निगरानी करती है। खाद्य व्यवसायों के लिए वैध लाइसेंस या पंजीकरण अनिवार्य होता है।

किन शिकायतों पर जारी हुए नोटिस

एफएसएसएआई को प्राप्त शिकायतों में एक्सपायर्ड व्हे प्रोटीन, बदबूदार और सड़े हुए अक्षयकल्पा ऑर्गेनिक अंडे, दूषित शिशु आहार, खराब दूध उत्पाद तथा क्षतिग्रस्त पैकेज्ड खाद्य सामग्री की बिक्री का उल्लेख किया गया। इसके अलावा, नियामक ने लाइसेंस संबंधी कथित भ्रामक जानकारी पर भी सवाल उठाए। उदाहरण के तौर पर, एनओआईसीई एग्स को ऐसे ब्रांड वर्ग में बेचे जाने का आरोप लगाया गया जो मौजूदा लाइसेंस के दायरे में शामिल नहीं था।

एफएसएसएआई ने क्या मांगी जानकारी

नियामक ने स्विगी इंस्टामार्ट से विस्तृत स्पष्टीकरण के साथ गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली, इन्वेंटरी प्रबंधन, भंडारण की स्थिति, स्वच्छता उपाय, खाद्य सुरक्षा निगरानी, आंतरिक नियंत्रण और अनुपालन रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बढ़ी निगरानी

क्विक-कॉमर्स मॉडल में स्थानीय डार्क स्टोर के माध्यम से बेहद कम समय में किराना और खाद्य उत्पादों की डिलीवरी की जाती है। ऐसे प्लेटफॉर्मों के लिए तापमान नियंत्रण, उत्पाद की शेल्फ-लाइफ, पैकेजिंग की गुणवत्ता, उत्पाद की ट्रेसबिलिटी और लाइसेंस की वैधता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। बढ़ती ऑनलाइन खाद्य खरीदारी के साथ नियामक एजेंसियां अब इन पहलुओं पर अधिक सख्ती से निगरानी कर रही हैं।

स्विगी का पक्ष

स्विगी ने कहा कि उसकी सहयोगी सेवा टोइंग से जुड़ा एक अलग प्रतिबंध आदेश केवल प्रशासनिक लाइसेंसिंग प्रक्रिया से संबंधित था और उसका समाधान 9 जुलाई 2026 को कर लिया गया था। कंपनी के अनुसार यह मामला खाद्य सुरक्षा जोखिम से जुड़ा नहीं था। हालांकि, स्विगी इंस्टामार्ट पर जारी नए नोटिस डिजिटल रिटेल और खाद्य वितरण प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही को रेखांकित करते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एफएसएसएआई की स्थापना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई थी।
  • भारत में प्रत्येक खाद्य व्यवसाय संचालक के लिए वैध एफएसएसएआई लाइसेंस या पंजीकरण आवश्यक होता है।
  • क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्थानीय डार्क स्टोर और कम समय की डिलीवरी प्रणाली के माध्यम से खाद्य एवं किराना उत्पाद पहुंचाते हैं।
  • खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन के अंतर्गत मिलावट, दूषण, गलत ब्रांडिंग, एक्सपायर्ड उत्पादों की बिक्री तथा लेबलिंग उल्लंघनों पर कार्रवाई की जाती है।

खाद्य सुरक्षा से जुड़े इस मामले ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों के विस्तार के साथ नियामक निगरानी भी अधिक सख्त होती जा रही है। उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण, उचित भंडारण, सही लेबलिंग और समयबद्ध अनुपालन अब केवल कानूनी आवश्यकता ही नहीं, बल्कि उपभोक्ता विश्वास बनाए रखने की भी अनिवार्य शर्त बन चुके हैं।

Originally written on July 11, 2026 and last modified on July 11, 2026.

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