तमिलनाडु के कोल्ली हिल्स में मिली नई फर्न प्रजाति ने बढ़ाई जैव-विविधता की अहमियत

तमिलनाडु के कोल्ली हिल्स में मिली नई फर्न प्रजाति ने बढ़ाई जैव-विविधता की अहमियत

तमिलनाडु के पूर्वी घाट क्षेत्र में कोल्ली हिल्स से फर्न की एक नई प्रजाति Pteris madhusoodananii का वैज्ञानिक वर्णन किया गया है। यह खोज न केवल वनस्पति-विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इस बात की भी याद दिलाती है कि भारत के पहाड़ी और कम-ज्ञात क्षेत्रों में अब भी कई दुर्लभ प्रजातियाँ छिपी हुई हैं। इस प्रजाति को प्रारंभिक रूप से IUCN रेड लिस्ट मानकों के तहत अत्यंत संकटग्रस्त माना गया है।

कैसे हुई पहचान

इस प्रजाति का वर्णन भारतीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने किया, जिसमें कलाथिल सेतुमाधवन अभिलाष, एलेन एलेक्स फिलिप, थेक्केकरा सुरेश गायत्री, एल. लीजा, सोजन जोस, सुरेश वीरनकुट्टी और वी. के. श्रीनिवास शामिल थे। इनका संबंध Government Victoria College, Sri Vyasa NSS College और Government College Chittur से है। शोध 30 जुलाई 2026 को Nordic Journal of Botany में प्रकाशित हुआ।

वैज्ञानिक अध्ययन में इस फर्न की बनावट को इसके निकट संबंधी प्रजातियों से अलग पाया गया। इसकी पत्तियाँ कठोर, चमड़े जैसी, चमकदार और गहरे हरे रंग की हैं। इसके अलावा पिन्ना-पिन्न्यूल संरचना और निचले खंडों के आधार पर उभरा हुआ लोब इसे Pteris वंश की अन्य प्रजातियों से अलग पहचान देता है।

स्पोर संरचना और आवास की खासियत

शोधकर्ताओं ने स्पोर्स की सूक्ष्म बनावट का अध्ययन स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी से किया। इसमें एक संकरी, लहरदार किनारों वाली पट्टी, यानी cingulum, देखी गई। संबंधित प्रजातियों में यह संरचना अपेक्षाकृत चिकनी और चौड़ी होती है, इसलिए यह सूक्ष्म अंतर भी वर्गीकरण में उपयोगी साबित हुआ।

अब तक यह प्रजाति कोल्ली हिल्स के केवल दो छोटे स्थलों से दर्ज की गई है, और इसका ज्ञात क्षेत्र लगभग 8 वर्ग किलोमीटर तक सीमित है। यह इलाका संरक्षित क्षेत्र के बाहर आता है, जिससे इसके आवास पर मानवीय दबाव और पर्यावरणीय जोखिम बढ़ जाते हैं।

संरक्षण के लिहाज से क्यों अहम है यह खोज

नई प्रजाति का मिलना जितना वैज्ञानिक उपलब्धि है, उतना ही संरक्षण के लिए चेतावनी भी है। बहुत सीमित क्षेत्र में पाई जाने वाली प्रजातियाँ, खासकर जब उनका आवास असुरक्षित हो, तेजी से संकट में आ सकती हैं। इसी कारण इस फर्न को प्रारंभिक रूप से Critically Endangered श्रेणी में रखा गया है, जो IUCN प्रणाली में विलुप्ति से ठीक पहले की सबसे गंभीर श्रेणी मानी जाती है।

यह खोज पूर्वी घाट की जैव-विविधता, विशेषकर फर्न प्रजातियों की विविधता, को समझने में मदद करती है। साथ ही यह भी स्पष्ट करती है कि स्थानीय स्तर पर वनस्पति सर्वेक्षण और सूक्ष्म वर्गीकरण अध्ययन संरक्षण नीति के लिए कितने जरूरी हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Pteris फर्न का एक वंश है, जो Pteridaceae कुल में रखा जाता है।
  • पूर्वी घाट भारत के पूर्वी तट के साथ फैली एक असतत पर्वत-श्रृंखला है।
  • एंडेमिक प्रजातियाँ किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र या आवास तक सीमित होती हैं।
  • Scanning Electron Microscopy का उपयोग स्पोर्स जैसी सूक्ष्म सतही संरचनाओं के अध्ययन में किया जाता है।

कोल्ली हिल्स से मिली यह नई फर्न प्रजाति भारत की वनस्पति संपदा की गहराई को सामने लाती है। साथ ही यह संदेश भी देती है कि छोटे और कम संरक्षित आवासों में मौजूद जैव-विविधता को पहचानना और बचाना उतना ही जरूरी है।

Originally written on August 11, 2026 and last modified on August 11, 2026.

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