1965 युद्ध के नायक अल्फ्रेड टायरोन कुक का निधन, वीरता की कहानी फिर चर्चा में

1965 युद्ध के नायक अल्फ्रेड टायरोन कुक का निधन, वीरता की कहानी फिर चर्चा में

भारतीय वायुसेना के वीर चक्र सम्मानित फ्लाइट लेफ्टिनेंट अल्फ्रेड टायरोन कुक का 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के बेस अस्पताल में 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 1965 के भारत-पाक युद्ध में पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयरबेस के ऊपर उनकी हवाई मुठभेड़ भारतीय सैन्य इतिहास की यादगार घटनाओं में गिनी जाती है।

कलाईकुंडा की मुठभेड़ ने दिलाई पहचान

सितंबर 1965 में हुए भारत-पाक युद्ध के दौरान कलाईकुंडा एयरबेस पर पाकिस्तानी साबर जेट विमानों ने हमला किया था। उस समय कुक ने हॉकर हंटर विमान उड़ाते हुए छह दुश्मन विमानों का सामना किया। इस कार्रवाई में उन्होंने एक पाकिस्तानी विमान को मार गिराया और एक अन्य को क्षतिग्रस्त किया। उनकी यह बहादुरी और त्वरित निर्णय क्षमता भारतीय वायुसेना के साहसिक अभियानों में विशेष स्थान रखती है।

वीर चक्र और वायुसेना में सेवा

अल्फ्रेड टायरोन कुक को 7 सितंबर 1965 को वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। वीर चक्र भारत का तीसरा सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है, जो शत्रु के सामने असाधारण साहस दिखाने पर दिया जाता है। कुक भारतीय वायुसेना की नंबर 14 स्क्वाड्रन में तैनात थे, जिसे ‘बुल्स’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 1968 में वायुसेना से सेवानिवृत्ति ली और बाद में ऑस्ट्रेलिया में बस गए।

मेडल दान और विरासत

सेवानिवृत्ति के बाद भी कुक का अपनी स्क्वाड्रन से जुड़ाव बना रहा। उन्होंने 2016 में अपना वीर चक्र पदक नंबर 14 स्क्वाड्रन को दान कर दिया था। यह कदम न केवल उनकी विनम्रता को दर्शाता है, बल्कि नई पीढ़ी के वायुसेना कर्मियों के लिए प्रेरणा भी बन गया। ऐसे सैन्य नायक युद्ध के इतिहास को केवल घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की जीवंत मिसाल बनाते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • वीर चक्र भारत का तीसरा सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता सम्मान है।
  • यह सम्मान 1950 में स्थापित किया गया था।
  • हॉकर हंटर एक ब्रिटिश जेट फाइटर था, जिसका उपयोग शीत युद्ध काल में कई वायु सेनाओं ने किया।
  • भारतीय वायुसेना की नंबर 14 स्क्वाड्रन को ‘बुल्स’ कहा जाता है।

अल्फ्रेड टायरोन कुक का निधन एक ऐसे योद्धा की याद दिलाता है, जिनकी वीरता ने 1965 के युद्ध में भारतीय वायुसेना की क्षमता और साहस को नई पहचान दी।

Originally written on September 19, 2026 and last modified on September 19, 2026.

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