FCRA में सक्रिय NGOs घटे, विदेशी फंडिंग बढ़ी
भारत में विदेशी चंदा लेने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की संख्या पिछले एक दशक में लगभग आधी रह गई है, लेकिन इनके जरिए आने वाली विदेशी राशि बढ़ी है। यह तस्वीर बताती है कि FCRA ढांचे के तहत जहां अनुपालन सख्त हुआ है, वहीं चुनिंदा संस्थाओं के पास विदेशी फंडिंग का प्रवाह पहले से अधिक केंद्रित हुआ है।
सक्रिय NGOs की संख्या में तेज गिरावट
विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम, यानी FCRA के तहत पंजीकृत सक्रिय NGOs की संख्या 2015 में 29,022 थी, जो 18 सितंबर 2026 तक घटकर 14,466 रह गई। यह गिरावट केवल संख्या की नहीं, बल्कि नियामकीय सख्ती और अनुपालन दबाव की भी कहानी है। सरकार ने अब तक 21,983 NGOs का FCRA पंजीकरण रद्द किया है। इनमें से 91.3% मामलों में कारण वार्षिक रिटर्न दाखिल न करना रहा।
विदेशी योगदान बढ़ा, लेकिन दायरा सिमटा
सक्रिय संस्थाओं की संख्या घटने के बावजूद FCRA-रजिस्टर्ड NGOs को मिलने वाला विदेशी योगदान 2015-16 के ₹17,832 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹22,974 करोड़ हो गया। इसका अर्थ है कि कम संस्थाओं के पास अधिक फंड पहुंच रहा है। FCRA के तहत विदेशी फंड प्राप्त करने वाली संस्थाओं को पंजीकरण, पूर्व अनुमति, लेखा-जोखा और रिपोर्टिंग जैसी शर्तों का पालन करना होता है। यह कानून 2010 में लागू किया गया था और इसका प्रशासन गृह मंत्रालय के पास है।
कहां से आया पैसा और कहां खर्च हुआ
वर्ष 2024-25 में विदेशी योगदान का सबसे बड़ा स्रोत संयुक्त राज्य अमेरिका रहा, जहां से ₹12,113 करोड़ आए। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दिल्ली को ₹5,834 करोड़ मिले, जो सबसे अधिक है। राज्यों में तमिलनाडु में 2,102 सक्रिय FCRA associations दर्ज की गईं, जो सबसे ज्यादा संख्या है।
उसी वर्ष कुल विदेशी योगदान का ₹13,071 करोड़, यानी 57%, सामाजिक गतिविधियों पर खर्च हुआ। शिक्षा क्षेत्र को ₹6,933 करोड़, यानी 30%, और धार्मिक उद्देश्यों के लिए ₹1,841 करोड़, यानी 8% मिले। यह वितरण दिखाता है कि विदेशी फंडिंग का बड़ा हिस्सा सामाजिक और शैक्षिक कार्यों में जा रहा है।
अप्रयुक्त राशि और हालिया नियमों का असर
2024-25 तक ₹35,968 करोड़ की विदेशी राशि अप्रयुक्त पड़ी थी। इसमें से NGOs ने ₹21,140 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में रखे हुए थे। धार्मिक योगदानों में भी अलग-अलग संगठनों की हिस्सेदारी दर्ज की गई, जिसमें ईसाई associations को ₹1,345 करोड़ और हिंदू NGOs को ₹328 करोड़ मिले।
22 जून 2026 से नए FCRA संशोधन नियम भी लागू हुए, जिनका संबंध विदेशी फंडिंग पाने वाले NGOs पर निगरानी और पारदर्शिता से है। कुल मिलाकर, यह आंकड़े बताते हैं कि भारत में विदेशी चंदे पर नियंत्रण और अनुपालन का ढांचा पहले से अधिक सख्त हुआ है, जबकि फंडिंग का आकार बना हुआ है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- FCRA का पूरा नाम Foreign Contribution (Regulation) Act है।
- यह कानून 2010 में लागू हुआ और विदेशी चंदे के उपयोग को नियंत्रित करता है।
- वार्षिक रिटर्न FCRA-रजिस्टर्ड संस्थाओं के लिए अनिवार्य अनुपालन है।
- FCRA से जुड़ी पंजीकरण और अनुपालन व्यवस्था का प्रशासन गृह मंत्रालय करता है।
आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि विदेशी फंडिंग का दायरा अब कम संस्थाओं तक सीमित है, लेकिन कुल राशि में कमी नहीं आई है। आने वाले समय में अनुपालन, पारदर्शिता और फंड उपयोग की निगरानी इस पूरे ढांचे का सबसे अहम हिस्सा बनी रहेगी।