स्कायरूट की नई लॉन्च डील से भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को गति
हैदराबाद की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्कायरूट एयरोस्पेस ने तिरुवनंतपुरम स्थित स्पेसटेक स्टार्टअप HEX20 के साथ मल्टी-लॉन्च एग्रीमेंट किया है। इस समझौते के तहत पृथ्वी-अवलोकन और पेलोड डेमोन्स्ट्रेशन मिशनों के लिए स्कायरूट के विक्रम-सीरीज लॉन्च वाहनों से तीन समर्पित प्रक्षेपण किए जाएंगे। मिशनों की शुरुआत 2027 की चौथी तिमाही से होने की योजना है।
क्या है मल्टी-लॉन्च एग्रीमेंट
मल्टी-लॉन्च एग्रीमेंट एक व्यावसायिक अनुबंध होता है, जिसमें तय अवधि के भीतर कई उपग्रह प्रक्षेपणों की रूपरेखा पहले से तय कर ली जाती है। यह मॉडल निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि इससे लॉन्च क्षमता, लागत और समय-सीमा को लेकर स्पष्टता मिलती है। इस समझौते को 6 अगस्त 2026 को अंतिम रूप दिया गया और इसे स्कायरूट के सह-संस्थापक व सीओओ नागा भरत दाका तथा HEX20 के सह-संस्थापक व सीओओ एम.बी. अरविंद ने हस्ताक्षरित किया।
विक्रम-1 की सफलता के बाद बढ़ा भरोसा
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब स्कायरूट के विक्रम-1 ने 18 जुलाई 2026 को अपनी पहली कक्षीय उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की। इसे भारत का पहला निजी रूप से विकसित ऑर्बिटल-क्लास लॉन्च व्हीकल बताया गया है। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित इस मिशन में कई ग्राहक पेलोड्स को लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया गया। इनमें SCOPE और Grahaa उपग्रह शामिल थे।
निजी अंतरिक्ष बाजार के लिए क्यों अहम है यह कदम
भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों के बाद निजी कंपनियों की भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में लॉन्च अनुबंध केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि एक उभरते वाणिज्यिक बाजार का संकेत भी हैं। विक्रम-सीरीज के मिशन ऑर्बिटल लॉन्च और राइडशेयर अवसरों के लिए तैयार किए गए हैं। राइडशेयर मॉडल में एक ही रॉकेट पर कई पेलोड्स को साथ भेजा जाता है, जिससे प्रति उपग्रह लॉन्च लागत कम हो सकती है। स्कायरूट ने आगे 2026 के अंत में एक और विक्रम-1 परीक्षण मिशन की योजना भी बताई है, जबकि कंपनी का दीर्घकालिक उत्पादन लक्ष्य सालाना 12 लॉन्च का है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित है और भारत का प्रमुख कक्षीय प्रक्षेपण स्थल है।
- लो अर्थ ऑर्बिट सामान्यतः पृथ्वी की सतह से लगभग 160 किमी से 2,000 किमी की ऊंचाई तक मानी जाती है।
- राइडशेयर लॉन्च में एक ही रॉकेट से कई पेलोड भेजे जाते हैं, जिससे लागत कम होती है।
- स्कायरूट एयरोस्पेस भारत की उन निजी अंतरिक्ष कंपनियों में शामिल है जो लॉन्च वाहन सेगमेंट में काम कर रही हैं।
इस समझौते से साफ है कि भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल परीक्षण चरण से आगे बढ़कर नियमित वाणिज्यिक लॉन्च की दिशा में बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में ऐसे अनुबंध देश की स्पेस इकॉनमी को नई रफ्तार दे सकते हैं।