केंद्र सरकार ने अल्कोहल युक्त औषधियों के लिए सख्त नियम लागू किए

केंद्र सरकार ने अल्कोहल युक्त औषधियों के लिए सख्त नियम लागू किए

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 10 जुलाई 2026 को ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन कर अधिक मात्रा में एथिल अल्कोहल युक्त औषधीय उत्पादों के नियमन को सख्त बना दिया है। नए नियमों के तहत कुछ अल्कोहल आधारित औषधियों को अनुसूची-के (Schedule K) में मिली छूट समाप्त कर दी गई है और अब उन्हें लाइसेंस तथा चिकित्सकीय पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) के तहत नियंत्रित किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य ऐसी औषधियों के दुरुपयोग को रोकना और उनके सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करना है।

ड्रग्स रूल्स, 1945 और विभिन्न अनुसूचियां

ड्रग्स रूल्स, 1945 के अंतर्गत दवाओं को विभिन्न अनुसूचियों (Schedules) में वर्गीकृत किया गया है, जिनके आधार पर उनकी बिक्री, वितरण, प्रिस्क्रिप्शन और रिकॉर्ड रखने के नियम निर्धारित होते हैं। अनुसूची-एच1 (Schedule H1) में शामिल दवाएं केवल पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जा सकती हैं और दवा विक्रेताओं को उनकी बिक्री का विस्तृत रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होता है। वहीं अनुसूची-के (Schedule K) के अंतर्गत कुछ दवाओं और औषधीय तैयारियों को पहले कुछ लाइसेंस संबंधी प्रावधानों से छूट प्राप्त थी।

अल्कोहल की मात्रा पर नए नियम

संशोधित नियमों के अनुसार, 12 प्रतिशत (v/v) से अधिक एथिल अल्कोहल वाली तथा 30 मिलीलीटर से अधिक मात्रा में उपलब्ध औषधीय तैयारियां अब अनुसूची-के के अंतर्गत छूट प्राप्त नहीं रहेंगी। ऐसे उत्पादों के निर्माण और बिक्री के लिए अब ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत आवश्यक लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। यह संशोधन आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी दवाओं में अनुमत 16 प्रतिशत तथा होम्योपैथिक दवाओं में अनुमत 12 प्रतिशत अल्कोहल सीमा के अनुरूप नियामक ढांचे को भी संतुलित करता है।

दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त निगरानी

कई राज्य सरकारों ने ऐसी औषधीय तैयारियों के दुरुपयोग की शिकायत की थी, जिनमें 80 से 90 प्रतिशत (v/v) एथिल अल्कोहल पाया गया और जिनका उपयोग नशे के उद्देश्य से किया जा रहा था। नए संशोधन के तहत ऐसे उत्पादों को अनुसूची-एच1 में शामिल किया गया है। अब इनकी बिक्री केवल पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही होगी और दवा दुकानों को इनके वितरण एवं बिक्री का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा। इससे इन औषधियों के अनियंत्रित उपयोग पर रोक लगाने में सहायता मिलेगी।

लागू होने की समय-सीमा

संशोधित नियम राजपत्र (गजट) में प्रकाशित होने के छह महीने बाद प्रभावी होंगे। इस प्रकार इनके जनवरी 2027 के आसपास लागू होने की संभावना है। इससे दवा निर्माता कंपनियों, वितरकों और फार्मेसियों को नए नियमों के अनुरूप आवश्यक तैयारियां करने का समय मिलेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 भारत में दवाओं के आयात, निर्माण, वितरण और बिक्री को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है।
  • अनुसूची-एच1 (Schedule H1) की दवाएं केवल पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जा सकती हैं।
  • अनुसूची-के (Schedule K) में कुछ दवाओं और औषधीय तैयारियों को पूर्व में विशेष छूट प्रदान की गई थी।
  • संशोधित नियम राजपत्र में प्रकाशन के छह महीने बाद, अर्थात जनवरी 2027 के आसपास लागू होंगे।

ड्रग्स रूल्स, 1945 में किया गया यह संशोधन औषधीय उत्पादों के सुरक्षित उपयोग और उनके दुरुपयोग की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सख्त लाइसेंस व्यवस्था, प्रिस्क्रिप्शन आधारित बिक्री और रिकॉर्ड रखने की अनिवार्यता से न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि दवाओं के जिम्मेदार उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

Originally written on July 11, 2026 and last modified on July 11, 2026.

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