वन नेशन, वन इलेक्शन प्रस्ताव को जेपीसी ने संविधान के अनुरूप बताया

वन नेशन, वन इलेक्शन प्रस्ताव को जेपीसी ने संविधान के अनुरूप बताया

संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने 11 जुलाई 2026 को कहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन (ओएनओई) का प्रस्तावित ढांचा भारतीय संविधान के अनुरूप है। समिति ने संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 का विस्तृत परीक्षण किया, जिसे 17 दिसंबर 2024 को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था और 19 दिसंबर 2024 को आगे की जांच के लिए जेपीसी को भेजा गया। समिति का निष्कर्ष है कि प्रस्तावित व्यवस्था संविधान की मूल भावना, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप है।

वन नेशन, वन इलेक्शन क्या है?

वन नेशन, वन इलेक्शन का उद्देश्य लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना है। वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों के कारण प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और आचार संहिता लागू होने से विकास कार्यों पर भी प्रभाव पड़ता है। प्रस्तावित प्रणाली के तहत राष्ट्रीय और राज्य स्तर के चुनाव एक निश्चित समय-सारणी के अनुसार एक साथ आयोजित किए जाएंगे, जिससे चुनावी प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी बनने की उम्मीद है।

संयुक्त संसदीय समिति की भूमिका

इस 41 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता भारतीय जनता पार्टी के सांसद पी. पी. चौधरी कर रहे हैं। समिति अब तक लगभग 16 बैठकों का आयोजन कर चुकी है। संसद भवन एनेक्सी के अलावा गोवा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में भी विचार-विमर्श किया गया। समिति ने संवैधानिक पहलुओं पर छह पूर्व मुख्य न्यायाधीशों सहित कई विधि विशेषज्ञों से परामर्श लिया। इसके अतिरिक्त नागरिक समाज के विभिन्न प्रतिनिधियों से भी राय ली गई, जिनमें से अधिकांश ने एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव का समर्थन किया।

संवैधानिक और संघीय ढांचे पर विचार

भारतीय संविधान संघीय शासन व्यवस्था प्रदान करता है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच विधायी एवं कार्यकारी शक्तियों का विभाजन किया गया है। समिति के अनुसार प्रस्तावित ढांचा इस संघीय व्यवस्था का उल्लंघन नहीं करता और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। संवैधानिक विशेषज्ञों ने भी इसे संविधान के अनुरूप बताया है। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 लाया गया है। संविधान संशोधन से जुड़े ऐसे विधेयकों को पारित करने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।

आर्थिक और प्रशासनिक प्रभाव

समिति ने अर्थशास्त्रियों से भी विचार-विमर्श किया। उनके आकलन के अनुसार यदि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाते हैं, तो चुनाव संबंधी व्यवधान कम होने और प्रशासनिक दक्षता बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था को लगभग 7 लाख करोड़ रुपये तक का संभावित लाभ मिल सकता है। साथ ही शासन व्यवस्था अधिक स्थिर और विकास कार्यों की गति बेहतर होने की संभावना जताई गई है। समिति के अध्यक्ष ने संकेत दिया है कि यदि आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो यह व्यवस्था 2029 के आम चुनाव तक पूरी तरह लागू की जा सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • लोकसभा भारतीय संसद का निचला सदन है, जिसका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 79 में किया गया है।
  • राज्य विधानसभाएं भारतीय संविधान के भाग-6 के अंतर्गत स्थापित निर्वाचित विधायी संस्थाएं हैं।
  • अनुच्छेद 368 भारत में संविधान संशोधन की प्रक्रिया निर्धारित करता है।
  • संयुक्त संसदीय समिति किसी विधेयक की विस्तृत जांच और परीक्षण के लिए गठित संसदीय तंत्र है।

वन नेशन, वन इलेक्शन पर चल रही संवैधानिक और राजनीतिक चर्चा भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि यह प्रस्ताव आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर लागू होता है, तो देश की चुनावी प्रणाली, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और आर्थिक गतिविधियों पर इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

Originally written on July 13, 2026 and last modified on July 13, 2026.

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