सुप्रीम कोर्ट में पांच नामों की सिफारिश
भारत के उच्च न्यायपालिका तंत्र में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति के लिए पांच नामों की सिफारिश की। इनमें चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना शामिल हैं। यह सिफारिश ऐसे समय में की गई है जब सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का निर्णय भी हाल ही में लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम भारत की उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण की सिफारिश करने वाली संस्था है। इसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश करते हैं और इसमें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। कॉलेजियम प्रणाली का उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखना और योग्य उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित करना है।
किन नामों की हुई सिफारिश
कॉलेजियम द्वारा जिन चार मुख्य न्यायाधीशों के नाम सुझाए गए हैं, उनमें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली शामिल हैं। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना का नाम भी सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की बढ़ी हुई क्षमता
हाल ही में पारित सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 के तहत सर्वोच्च न्यायालय की स्वीकृत न्यायाधीश संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई है। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। यह परिवर्तन 16 मई 2026 को जारी अध्यादेश के बाद लागू किया गया। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 32 न्यायाधीश कार्यरत हैं और वर्ष 2026 में कुछ और सेवानिवृत्तियां होने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” भारत का सुप्रीम कोर्ट 26 जनवरी 1950 को स्थापित हुआ था। ” सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश करते हैं। ” जस्टिस बी.वी. नागरत्ना सुप्रीम कोर्ट की महिला न्यायाधीशों में प्रमुख नाम हैं। ” सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृत न्यायाधीश संख्या में मुख्य न्यायाधीश भी शामिल होते हैं। सुप्रीम कोर्ट में नए न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायपालिका की कार्यक्षमता और लंबित मामलों के निपटारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कॉलेजियम की यह सिफारिश आने वाले समय में सर्वोच्च न्यायालय की संरचना और न्यायिक प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।