असम विधानसभा ने पारित किया यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक

असम विधानसभा ने पारित किया यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक

असम विधानसभा ने 27 मई 2026 को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह विधेयक 25 मई 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत किया गया था और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने इसे सदन में पेश किया। इस विधेयक के पारित होने के साथ असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने वाला भारत का तीसरा राज्य बन गया है। साथ ही यह उत्तर-पूर्व भारत का पहला राज्य है जिसने ऐसा कानून पारित किया है। यह कानून विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे नागरिक मामलों के लिए समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास करता है। राज्य सरकार का कहना है कि इससे समान नागरिक अधिकारों और सामाजिक सुधार को बढ़ावा मिलेगा।

यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है

यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ है कि सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों से संबंधित एक समान कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में यूनिफॉर्म सिविल कोड का उल्लेख राज्य के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत किया गया है। हालांकि नीति निदेशक तत्व न्यायालय में लागू नहीं किए जा सकते, लेकिन वे सरकार को सामाजिक और कानूनी सुधारों की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

असम यूसीसी विधेयक की प्रमुख विशेषताएँ

असम का यह नया विधेयक राज्य के सभी नागरिकों पर लागू होगा, चाहे वे किसी भी धर्म से संबंधित हों। इसके अंतर्गत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों को कानूनी रूप से विनियमित किया जाएगा। विधेयक में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। लिव-इन संबंधों को भी कानूनी रूप से पंजीकृत करना होगा और इसके लिए एक महीने की समय सीमा निर्धारित की गई है। हालांकि इस कानून के दायरे से असम में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखा गया है। इसके साथ ही कानून लागू होने से पहले संपन्न बहुविवाह संबंधों को सुरक्षित रखने के लिए एक “सेविंग क्लॉज” भी शामिल किया गया है।

कानूनी और विधायी संदर्भ

इस विधेयक के लागू होने के बाद “असम अनिवार्य मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण अधिनियम, 2024” को निरस्त करने का प्रस्ताव रखा गया है। राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से पारिवारिक कानूनों में एकरूपता लाई जा सकेगी। यूनिफॉर्म सिविल कोड लंबे समय से भारतीय राजनीति और संवैधानिक चर्चा का महत्वपूर्ण विषय रहा है। समर्थकों के अनुसार यह समान नागरिक अधिकारों को मजबूत करेगा, जबकि विरोधी इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में यूनिफॉर्म सिविल कोड का उल्लेख किया गया है।
  • असम विधानसभा ने 27 मई 2026 को यूसीसी विधेयक पारित किया।
  • असम यूसीसी विधेयक से अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखा गया है।
  • बहुविवाह उस विवाह व्यवस्था को कहा जाता है जिसमें एक व्यक्ति के एक से अधिक जीवनसाथी होते हैं।

असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक का पारित होना देश में नागरिक कानूनों की समानता पर चल रही बहस में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। यह कदम राज्य की कानूनी और सामाजिक व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत देता है और भविष्य में अन्य राज्यों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

Originally written on May 27, 2026 and last modified on May 27, 2026.

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