असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक पेश
असम सरकार ने 25 मई 2026 को विधानसभा में “द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, बिल 2026” पेश किया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया। यह विधेयक राज्य में व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में समान नागरिक व्यवस्था लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है
यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता एक ऐसा प्रस्तावित कानूनी ढांचा है, जिसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए सभी नागरिकों पर समान नियम लागू किए जाते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में इसे राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों में शामिल किया गया है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
असम सरकार के इस विधेयक में पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है। इसमें बहुविवाह पर रोक लगाने का प्रावधान भी शामिल है। विधेयक के अनुसार बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार देने की व्यवस्था की गई है। साथ ही live-in relationship का अनिवार्य पंजीकरण भी प्रस्तावित किया गया है, ताकि ऐसे संबंधों को कानूनी मान्यता और सुरक्षा मिल सके।
जनजातीय समुदायों को छूट
विधेयक में असम के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। उनकी पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं और customary laws को भी इस कानून से छूट दी गई है। यह कदम संविधान के तहत जनजातीय समुदायों को प्राप्त विशेष संरक्षण को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
असम में विधायी प्रक्रिया
असम कैबिनेट ने 13 मई 2026 को यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी थी। इसके बाद 25 मई को इसे विधानसभा में पेश किया गया। विधेयक पर चर्चा और संभावित पारित होने की प्रक्रिया 27 मई 2026 को निर्धारित की गई थी। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो असम यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने वाला भारत का तीसरा राज्य बन जाएगा। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात इस दिशा में कदम उठा चुके हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों का हिस्सा है।
- उत्तराखंड वर्ष 2024 में यूनिफॉर्म सिविल कोड कानून पारित करने वाला पहला राज्य बना था।
- गुजरात ने भी वर्ष 2024 में यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक पारित किया।
- भारत में personal law के अंतर्गत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामले आते हैं।
असम का यह प्रस्तावित कानून देश में समान नागरिक संहिता को लेकर चल रही बहस को नई दिशा दे सकता है। इसके जरिए राज्य सरकार सामाजिक और कानूनी सुधारों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है, जबकि जनजातीय परंपराओं को भी संरक्षित रखने की कोशिश की गई है।