सुंदरराज पी बने राष्ट्रीय जांच एजेंसी के नए इंस्पेक्टर जनरल
केंद्र सरकार ने 16 जून 2026 को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी सुंदरराज पी (Sundarraj P), जिन्हें सुंदरराज पट्टिलिंगम के नाम से भी जाना जाता है, को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) नियुक्त किया। वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी इससे पहले छत्तीसगढ़ में महत्वपूर्ण सुरक्षा और नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व कर रहे थे। उनकी नियुक्ति को आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी जांच व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) क्या है?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency – NIA) भारत की संघीय आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी है। इसकी स्थापना राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के तहत की गई थी। यह एजेंसी गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और देश की संप्रभुता, सुरक्षा तथा अखंडता से जुड़े गंभीर अपराधों की जांच करती है। एनआईए आतंकवाद, उग्रवाद, आतंकी वित्तपोषण, संगठित अपराध तथा अधिनियम में सूचीबद्ध अन्य अपराधों की जांच के लिए अधिकृत है।
सुंदरराज पी का पुलिस सेवा अनुभव
सुंदरराज पी भारतीय पुलिस सेवा के 2003 बैच के अधिकारी हैं और छत्तीसगढ़ कैडर से संबंधित हैं। उन्होंने दक्षिण छत्तीसगढ़ के संवेदनशील बस्तर रेंज में लगभग 12 वर्षों तक सेवा दी। इनमें से सात वर्षों तक वे लगातार बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) के पद पर रहे। बस्तर क्षेत्र में उनके कार्यकाल को नक्सल विरोधी अभियानों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
बस्तर रेंज और नक्सल विरोधी अभियान
बस्तर रेंज दक्षिण छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण पुलिस क्षेत्र है, जिसमें सात जिले शामिल हैं। यह क्षेत्र लंबे समय से माओवादी या नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहा है। सुंदरराज पी ने अपने कार्यकाल के दौरान राज्य पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और प्रशासनिक एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए कई नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया। उन्होंने विशेष रूप से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और अन्य केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के साथ मिलकर सुरक्षा अभियानों का संचालन किया।
प्रतिनियुक्ति (Deputation) प्रक्रिया
16 जून 2026 को गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र भेजकर सुंदरराज पी को एनआईए में प्रतिनियुक्ति पर भेजने का निर्देश दिया। प्रतिनियुक्ति (Deputation) वह व्यवस्था है जिसमें किसी राज्य कैडर के अधिकारी को निश्चित अवधि के लिए केंद्र सरकार या किसी अन्य संगठन में नियुक्त किया जाता है। इसके तहत छत्तीसगढ़ सरकार से उन्हें कार्यमुक्त कर केंद्र में नई जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा गया।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति
नक्सलवाद भारत के कुछ मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में सक्रिय माओवादी उग्रवाद से जुड़ा है। छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर संभाग, लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से सुरक्षा अभियानों, विकास योजनाओं और प्रशासनिक पहुंच के माध्यम से इस समस्या से निपटने का प्रयास कर रही हैं। केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद समाप्त करने के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा निर्धारित की थी।
एनआईए में नई भूमिका
एनआईए में इंस्पेक्टर जनरल के रूप में सुंदरराज पी आतंकवाद, उग्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनका लंबे समय का सुरक्षा अनुभव और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्य करने का अनुभव एजेंसी के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की स्थापना राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के तहत हुई थी।
- एनआईए गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।
- सुंदरराज पी 2003 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं।
- बस्तर रेंज दक्षिण छत्तीसगढ़ के सात जिलों को कवर करती है।
- प्रतिनियुक्ति राज्य कैडर अधिकारी की अस्थायी केंद्रीय नियुक्ति होती है।
- नक्सलवाद माओवादी उग्रवाद से संबंधित है।
- केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) नक्सल विरोधी अभियानों में प्रमुख भूमिका निभाता है।
- एनआईए आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच करती है।
सुंदरराज पी की एनआईए में इंस्पेक्टर जनरल के रूप में नियुक्ति भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव और नक्सल विरोधी अभियानों में उनकी भूमिका से राष्ट्रीय जांच एजेंसी को आतंकवाद और उग्रवाद से जुड़े मामलों की जांच में अतिरिक्त विशेषज्ञता प्राप्त होगी।