मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पेश होगा समान नागरिक संहिता विधेयक
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 17 जून 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) विधेयक प्रस्तुत करेगी। मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से 24 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट भी पेश किया जाना प्रस्तावित है। सरकार ने संकेत दिया है कि समान नागरिक संहिता विधेयक को इसी सत्र में पारित कराने का प्रयास किया जाएगा।
समान नागरिक संहिता क्या है?
समान नागरिक संहिता (UCC) का अर्थ ऐसे समान नागरिक कानूनों से है जो सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हों, चाहे उनका धर्म, समुदाय या परंपरा कोई भी हो। यह कानून सामान्यतः निम्न विषयों से संबंधित होता है—
- विवाह
- तलाक
- उत्तराधिकार
- गोद लेना
- संपत्ति का उत्तराधिकार और उत्तराधिकार संबंधी अधिकार
वर्तमान में भारत में इन विषयों पर विभिन्न धार्मिक समुदायों के अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं।
संविधान में UCC का आधार
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को देश के नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की सलाह दी गई है। अनुच्छेद 44 राज्य के नीति निदेशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) का हिस्सा है। हालांकि यह न्यायालय द्वारा लागू कराने योग्य नहीं है, लेकिन शासन और नीति निर्माण के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत माना जाता है।
मध्य प्रदेश में विधेयक तैयार करने की प्रक्रिया
मध्य प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2026 में समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति को 60 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दायित्व दिया गया था। इस दौरान समिति ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोगों से सुझाव प्राप्त किए।
अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन
समिति समान नागरिक संहिता के संबंध में अन्य राज्यों के अनुभवों का भी अध्ययन कर रही है। विशेष रूप से उत्तराखंड और गुजरात में अपनाए गए मॉडल का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि मध्य प्रदेश के लिए उपयुक्त कानूनी ढांचा तैयार किया जा सके। उत्तराखंड वर्ष 2024 में समान नागरिक संहिता कानून लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बना था।
विधानसभा सत्र में प्रमुख मुद्दा
मध्य प्रदेश विधानसभा के पांच दिवसीय मानसून सत्र में UCC विधेयक प्रमुख विधायी एजेंडा होगा। इसके अतिरिक्त अनुपूरक बजट, संशोधन विधेयक और अन्य सरकारी प्रस्तावों पर भी चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संकेत दिया है कि विधेयक को इसी सत्र में पारित कराने का प्रयास किया जा सकता है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विधेयक की प्रस्तावित रूपरेखा पर विपक्ष ने कुछ प्रश्न भी उठाए हैं। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सवाल उठाया है कि यदि आदिवासी समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाता है, तो इसकी समानता पर प्रश्न खड़े हो सकते हैं। उन्होंने प्रस्तावित कानून में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों पर भी चिंता व्यक्त की है।
महाकाल संदर्भ
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने वक्तव्य में बाबा महाकाल का उल्लेख भी किया। बाबा महाकाल, उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के अधिष्ठाता देवता भगवान शिव का लोकप्रिय नाम है और मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- समान नागरिक संहिता विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों के लिए समान कानून का प्रावधान करती है।
- अनुच्छेद 44 भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों का हिस्सा है।
- मध्य प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2026 में UCC मसौदा समिति का गठन किया था।
- समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।
- मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 से 24 जुलाई 2026 तक आयोजित होगा।
- उत्तराखंड 2024 में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला भारतीय राज्य बना था।
- मध्य प्रदेश विधानसभा राज्य की एकसदनीय (Unicameral) विधायिका है।
- महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन, मध्य प्रदेश में स्थित है।
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता विधेयक का प्रस्ताव देश में नागरिक कानूनों के एकरूपीकरण पर चल रही बहस को नई दिशा दे सकता है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने वाला प्रमुख राज्य बन सकता है, जिससे संवैधानिक, सामाजिक और कानूनी विमर्श को नया आयाम मिलेगा।