राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव: वंदे मातरम् को मिलेगा वैधानिक संरक्षण
भारत सरकार मानसून सत्र 2026 के दौरान राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को लोकसभा में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। यह विधेयक 20 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाना प्रस्तावित है। इस संशोधन का उद्देश्य वंदे मातरम् को राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के तहत वैधानिक संरक्षण प्रदान करना है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो वंदे मातरम् को सम्मान और संरक्षण के मामले में राष्ट्रीय गान जन गण मन के समान कानूनी दर्जा प्राप्त होगा।
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 क्या है?
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 एक केंद्रीय कानून है, जिसका उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान की रक्षा करना है। यह अधिनियम राष्ट्रीय ध्वज, संविधान तथा राष्ट्रीय गान के अपमान से संबंधित अपराधों और दंड का प्रावधान करता है। भारत का राष्ट्रीय गान जन गण मन है, जिसे 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने आधिकारिक रूप से अपनाया था। यह अधिनियम राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कानूनी आधार प्रदान करता है।
वंदे मातरम् को वैधानिक संरक्षण देने का उद्देश्य
वंदे मातरम् प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ में वर्ष 1882 में प्रकाशित हुआ था। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का प्रमुख प्रतीक बना। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य वंदे मातरम् के गायन के दौरान अपमान, बाधा या अवमानना की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करना है। इसके तहत ऐसे मामलों में तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान प्रस्तावित है।
आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् को लेकर निर्देश
9 जुलाई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों को निर्देश जारी किए कि सभी आधिकारिक कार्यक्रमों में जन गण मन से पहले वंदे मातरम् का गायन या वादन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निर्देश में वंदे मातरम् के सभी छह पदों को गाने या बजाने की बात भी कही गई। इन निर्देशों का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों और देशभक्ति से जुड़े सांस्कृतिक मूल्यों को अधिक व्यापक रूप से प्रोत्साहित करना है।
संसद में विधेयक की प्रक्रिया
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 107 के अनुसार, लोकसभा या राज्यसभा में किसी विधेयक के प्रस्तुत होने के साथ ही वह विधायी प्रक्रिया का हिस्सा बन जाता है। इसके बाद विधेयक पर चर्चा, विचार-विमर्श और दोनों सदनों की स्वीकृति के पश्चात राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर वह कानून का रूप लेता है। संसद का मानसून सत्र भारत की तीन नियमित संसदीय बैठकों में से एक है। अन्य दो सत्र बजट सत्र और शीतकालीन सत्र हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जन गण मन को 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रीय गान के रूप में अपनाया था।
- राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान के सम्मान की रक्षा करने वाला केंद्रीय कानून है।
- वंदे मातरम् पहली बार 1882 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ था।
- प्रस्तावित संशोधन विधेयक में वंदे मातरम् के अपमान या गायन में बाधा उत्पन्न करने पर तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान प्रस्तावित है।
प्रस्तावित संशोधन विधेयक राष्ट्रीय प्रतीकों और देशभक्ति से जुड़े सांस्कृतिक प्रतीकों के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि संसद इस विधेयक को पारित करती है, तो वंदे मातरम् को राष्ट्रीय सम्मान से संबंधित कानूनी संरक्षण के दायरे में विशेष स्थान मिलेगा। साथ ही यह कदम राष्ट्रीय विरासत और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा।