दिल्ली कैबिनेट ने समयबद्ध सरकारी सेवाओं के अधिकार संबंधी विधेयक 2026 को दी मंजूरी

दिल्ली कैबिनेट ने समयबद्ध सरकारी सेवाओं के अधिकार संबंधी विधेयक 2026 को दी मंजूरी

दिल्ली सरकार ने 14 जुलाई 2026 को नागरिकों को समयबद्ध और सरल तरीके से सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दिल्ली (नागरिकों का समयबद्ध एवं सुगम सेवा वितरण का अधिकार) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। इस विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता को नागरिकों का कानूनी अधिकार बनाना है। इसके लागू होने पर वर्ष 2011 का दिल्ली नागरिकों का समयबद्ध सेवा वितरण अधिकार अधिनियम प्रतिस्थापित हो जाएगा। यह पहल प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल शासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नए विधेयक की प्रमुख विशेषताएं

वर्ष 2026 का यह विधेयक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सार्वजनिक सेवाओं के लिए पूर्णतः डिजिटल और एंड-टू-एंड सेवा वितरण प्रणाली स्थापित करने का प्रस्ताव रखता है। इसके तहत नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन, निगरानी और प्राप्ति की सुविधा मिलेगी। यदि किसी सेवा के वितरण में निर्धारित समय सीमा से अधिक विलंब होता है, तो मामला स्वतः उच्च अधिकारी के पास पहुंच जाएगा। इस स्वचालित एस्केलेशन प्रणाली का उद्देश्य देरी को कम करना और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

शिकायत निवारण और आयोग का गठन

विधेयक में दिल्ली राइट टू सर्विस आयोग के गठन का भी प्रस्ताव किया गया है। यह आयोग सेवा वितरण की निगरानी करेगा, शिकायतों का स्वतंत्र रूप से निस्तारण करेगा तथा समय सीमा का पालन न करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त, विधेयक में सेवा वितरण में अनावश्यक देरी या नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। इससे सरकारी विभागों में कार्यकुशलता और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

2011 के कानून का विस्तार

इससे पहले 23 जून 2026 को दिल्ली सरकार ने वर्ष 2011 के अधिनियम के अंतर्गत 23 नई सेवाओं को शामिल किया था। इसके बाद इस कानून के तहत आने वाली कुल सेवाओं की संख्या बढ़कर 584 हो गई। इन सेवाओं में श्रम, पर्यटन, दिल्ली जल बोर्ड, ऊर्जा, आबकारी, वन विभाग और रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों की सेवाएं शामिल हैं। यह विस्तार नागरिकों को अधिक सरकारी सेवाएं तय समय सीमा में उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।

सेवा वितरण की समय-सीमा

नई सेवाओं के अंतर्गत दुकान एवं स्थापना अधिनियम के तहत पंजीकरण एक दिन के भीतर करने का प्रावधान रखा गया है। वहीं श्रम विभाग द्वारा फैक्ट्री योजनाओं की स्वीकृति अधिकतम 15 दिनों के भीतर देने की समय सीमा निर्धारित की गई है। इस प्रकार विभिन्न विभागों के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय कर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • दिल्ली नागरिकों का समयबद्ध सेवा वितरण अधिकार अधिनियम वर्ष 2011 में लागू किया गया था।
  • दिल्ली (नागरिकों का समयबद्ध एवं सुगम सेवा वितरण का अधिकार) विधेयक, 2026 वर्ष 2011 के कानून का स्थान लेने का प्रस्ताव करता है।
  • नए विधेयक में दिल्ली राइट टू सर्विस आयोग के गठन का प्रस्ताव है, जो शिकायत निवारण और सेवा वितरण की निगरानी करेगा।
  • विस्तारित सेवा सूची में दिल्ली जल बोर्ड और रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) सहित कई प्रमुख विभागों और संस्थाओं की सेवाएं शामिल हैं।

यह विधेयक दिल्ली में सुशासन, डिजिटल प्रशासन और नागरिक-केंद्रित सेवा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है। समयबद्ध सेवा वितरण को कानूनी अधिकार का स्वरूप मिलने से सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही सुनिश्चित होगी और नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक सरल, तेज और प्रभावी तरीके से मिल सकेगा।

Originally written on July 15, 2026 and last modified on July 15, 2026.

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